भारतीय वॉरशिप के सामने आया पाकिस्तानी जहाज, समुद्र में टक्कर से मची खलबली

मुंबई
भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री मोर्चे पर तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत और पाकिस्तान नौसेना के एक जहाज के बीच टक्कर हो गई। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज एक नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब तेज गति से आया और इस दौरान उसने गैर-पेशेवर तथा असुरक्षित तरीके से मैन्युवरिंग की। इसी वजह से दोनों जहाजों की टक्कर हुई। हालांकि, टक्कर में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लिया है और पाकिस्तान के राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
अचानक सामने आया पाकिस्तानी जहाज
अरब सागर के समंदर में दो देशों के युद्धपोतों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. खासकर तब, जब दोनों जहाज अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम कर रहे हों. इस घटना में भारतीय युद्धपोत अपनी नियमित निगरानी ड्यूटी कर रहा था. तभी पाकिस्तानी नौसेना का जहाज उसकी तरफ तेजी से बढ़ा. पाकिस्तानी जहाज ने जिस तरह से समुद्र में अपनी दिशा बदली, वह सुरक्षित नौवहन के नियमों के अनुरूप नहीं था. इसके बाद पाकिस्तानी जहाज ने भारतीय युद्धपोत को टक्कर मार दी. हालांकि, इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
समंदर में इतनी हलचल क्यों मची?
क्योंकि मामला भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं से जुड़ा है. इसलिए यह भिड़ंत काफी अहम है. दोनों देशों के बीच संबंध पहले से ही संवेदनशील हैं. ऐसे में समुद्र में दोनों देशों के युद्धपोतों का इस तरह आमने-सामने आना चिंता बढ़ाने वाला है. हालांकि, यह बात साफ है कि यह घटना को सैन्य हमला नहीं है. भारत की ओर से इसे पाकिस्तानी जहाज की असुरक्षित और गैर-पेशेवर गतिविधि से जुड़ी घटना बताया गया है. यही वजह है कि भारत ने मामले को केवल नौसेना स्तर तक सीमित नहीं रखा. इसे राजनयिक स्तर पर भी उठाया गया।
भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब
घटना के बाद भारत ने आज यानी बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान के टॉप राजनयिक प्रतिनिधि को तलब किया. भारत ने इस मामले पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया. विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का व्यवहार अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर था. भारत ने पाकिस्तान से कहा कि उसके सैन्य जहाजों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए. साथ ही दोनों देशों के बीच हुए संबंधित समझौतों का पालन करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
1991 के समझौते का क्यों आया जिक्र?
भारत ने इस घटना को अप्रैल 1991 में हुए भारत-पाकिस्तान समझौते से भी जोड़ा है. इस समझौते का मकसद सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिक गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच गलतफहमी और दुर्घटना का खतरा कम करना था. इसके अनुच्छेद 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के बीच अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षित दूरी बनाए रखने की बात कही गई है. उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों देशों के जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील के भीतर नहीं आना चाहिए. यानी इस तरह के समझौते का मकसद ही यह है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयां समुद्र में इस तरह की स्थिति पैदा न करें, जिससे टक्कर या किसी बड़े सैन्य विवाद का खतरा पैदा हो।
ऐसा पहले भी हो चुका है
भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में टकराव का विवाद नया नहीं है. जून 2011 में भी आईएनएस गोदावरी और पाकिस्तान नौसेना के पीएनएस बाबर को लेकर विवाद हुआ था. उस समय दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए थे. भारत ने पाकिस्तान के जहाज पर जोखिम भरे तरीके से चलने का आरोप लगाया था और 1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला देते हुए विरोध दर्ज कराया था. इससे साफ है कि समुद्र में दोनों देशों के युद्धपोतों के बीच सुरक्षित दूरी और संचार कितना अहम है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि इस घटना में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है. लेकिन भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए राजनयिक स्तर पर विरोध दर्ज कराया है. भारत ने पाकिस्तान से अपने नौसैनिक जहाजों को सावधानी बरतने और दोनों देशों के बीच मौजूद समझौतों का सम्मान करने को कहा है. साथ ही भारत के इस्लामाबाद स्थित प्रभारी राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है. यानी समुद्र में हुई एक टक्कर अब कूटनीतिक मुद्दा भी बन गई है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तान इस घटना पर क्या प्रतिक्रिया देता है और दोनों देशों की नौसेनाएं भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या कदम उठाती हैं।
कैसे हुई टक्कर?
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का फ्रंटलाइन युद्धपोत उत्तर अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया।
बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी जहाज की मैन्युवरिंग को असुरक्षित और गैर-पेशेवर माना गया। दोनों जहाजों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं रह गई और आखिरकार उनकी टक्कर हो गई।
फिलहाल सार्वजनिक तौर पर दोनों जहाजों के नाम और टक्कर की सटीक लोकेशन जैसी तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है।
बड़ा नुकसान नहीं, फिर भी भारत ने क्यों जताई नाराजगी?
घटना में फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में दोनों देशों के युद्धपोतों की सुरक्षित दूरी और संचालन को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से समझौता मौजूद है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के कार्यवाहक राजदूत को तलब किया। उनके सामने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
भारत ने कहा कि इस घटना में पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य अभ्यासों, युद्धाभ्यासों और सैनिकों की आवाजाही के बारे में अग्रिम सूचना पर समझौता के आर्टिकल 10 के सीधे खिलाफ था।
1991 के समझौते में क्या है?
भारत और पाकिस्तान ने अप्रैल 1991 में सैन्य गतिविधियों से जुड़ी गलतफहमियों और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक समझौता किया था। इसके आर्टिकल 10 में दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संचालन को लेकर विशेष प्रावधान है। इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों को एक-दूसरे के तीन नॉटिकल मील से कम करीब नहीं आना चाहिए, ताकि दुर्घटना से बचा जा सके। तीन नॉटिकल मील करीब 5.56 किलोमीटर के बराबर होते हैं। इस प्रावधान का उल्लेख भारत सरकार के पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी मिलता है। इसलिए मौजूदा घटना में भारत की आपत्ति केवल टक्कर होने को लेकर नहीं है, बल्कि यह भी है कि पाकिस्तानी जहाज ने अंतरराष्ट्रीय समुद्र में सुरक्षित संचालन के लिए मौजूद द्विपक्षीय व्यवस्था का पालन नहीं किया।
भारत ने पाकिस्तान से क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पाकिस्तानी कार्यवाहक राजदूत को कहा गया है कि वह पाकिस्तान के संबंधित अधिकारियों तक भारत की आपत्ति पहुंचाएं। भारत ने स्पष्ट किया है कि दोनों देशों की सैन्य इकाइयों को समुद्र में उचित सावधानी बरतनी चाहिए, एक-दूसरे के साथ सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए, दोनों देशों के बीच मौजूद प्रासंगिक समझौतों का सम्मान करना चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। इसके साथ ही इस्लामाबाद में भारत के कार्यवाहक राजदूत को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी तरह का विरोध दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।
क्या यह पहली बार हुआ है?
भारत और पाकिस्तान की नौसेनाओं के बीच समुद्र में इस तरह की तनातनी का इतिहास पुराना है। 2011 में भी INS दोगावरी और पाकिस्तान के PNS बाबर के बीच अरब सागर/हाई सीज क्षेत्र में संपर्क की घटना हुई थी। उस समय भी दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर खतरनाक मैन्युवरिंग के आरोप लगाए थे और भारत ने आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।



